2002 चैंपियंस ट्रॉफी की भारतीय टीम: अब वे खिलाड़ी कहां हैं ?

2017 की चैंपियंस ट्रॉफी शुरु होने वाली है। भारतीय टीम अपने टाइटल को डिफेंड करने के लिए इंग्लैंड पहुंच चुकी है। जहां उसका पहला मुकाबला 4 जून को अपने चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान से होगा।

2013 की चैंपियंस ट्रॉफी भारतीय टीम के नाम रही थी। महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को हराकर खिताब पर कब्जा जमाया था।

पहली बार भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब साल 2002 में जीता था लेकिन उस समय भारतीय टीम को ये खिताब श्रीलंकाई टीम से शेयर करना पड़ा था। क्योंकि फाइनल मुकाबला बारिश की वजह से धुल गया था। इसलिए भारत और श्रीलंका को संयुक्त रुप से विजेता घोषित किया गया था।

15 साल पहले जिस भारतीय टीम ने श्रीलंका में चैंपियंस ट्रॉफी खेला था। उनमें से 3 ही खिलाड़ी अब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं। इनमें से एक प्लेयर इस साल की चैंपियंस ट्रॉफी में हिस्सा लेगा।

आइए आपको बताते हैं 2002 के चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम की तरफ से खेलने वाले सभी 15 खिलाड़ी इस वक्त क्या कर रहे हैं।
दिनेश मोंगिया
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चैंपियंस ट्रॉफी से पहले जिम्बॉब्वे के खिलाफ सीरीज में दिनेश मोंगिया ने काफी शानदार प्रदर्शन किया था। अपने शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने मैन ऑफ द् सीरीज का खिताब जीता था। इसी वजह से उन्हें चैंपियंस ट्रॉफी में जगह मिली।

चैंपियंस ट्रॉफी के वक्त वो काफी शानदार फॉर्म में थे, लेकिन दुर्भाग्य से चैंपियंस ट्रॉफी में उनका बल्ला नहीं चला। चैंपियंस ट्रॉफी की 3 पारियों में वो महज 1 ही रन बना सके। खराब फॉर्म की वजह से उनका करियर ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया।

अपना आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच उन्होंने 2007 में बांग्लादेश के खिलाफ खेला था। इसके बाद इंडियन क्रिकेट लीग में भी उन्होंने हिस्सा लिया। हालांकि उस लीग में उनका अनुभव काफी बुरा रहा। उन पर मैच फिक्सिंग के भी आरोप लगे।

इसके अलावा लैशिंग वर्ल्ड इलेवन की तरफ से भी उन्होंने क्रिकेट खेला। इस समय चंडीगढ़ में वो एक स्कूल टीम के कोच हैं। इसके अलावा मोंगिया एक फिल्म ‘कबाब में हड़्डी’ में भी अभिनय कर चुके हैं।

वीरेंद्र सहवाग
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चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले ही वीरेंद्र सहवा ने एक ओपनर के तौर पर खेलना शुरु किया था और ये फैसला उनके करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

चैंपियंस ट्रॉफी में सहवाग का बल्ला जमकर बोला। वो भारतीय टीम की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। 5 मैचों में वीरेंद्र सहवाग ने 90.33 की औसत से 271 रन बनाए।  टूर्नामेंट में उन्होंने एक शतक और 2 अर्धशतक जमाए।

वीरेंद्र सहवाग का अंतर्राष्ट्रीय करियर काफी सफल रहा। 2011 तक उन्होंने भारतीय टीम की तरफ से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला। इस समय वो ट्विटर पर काफी सक्रिय रहते हैं और इंडियन प्रीमियर लीग में किंग्स इलेवन पंजाब की टीम के मेंटोर हैं।
सौरव गांगुली
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मैच फिक्सिंग केस के बाद सौरव गांगुली को साल 2000 में भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई। कप्तानी मिलने के बाद सौरव गांगुली ने भारतीय टीम में एक नई जान फूंक दी। गांगुली को भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक माना जाता है।

कप्तानी मिलने के बाद साल 2002 की चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम संयुक्त रुप से विजेता रही थी। गांगुली ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन कप्तानी की। इसके एक ही साल बाद 2003 वर्ल्ड कप में उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया।

चैंपियंस ट्रॉफी में सौरव गांगुली ने 3 पारियों में बल्लेबाजी की और 71.50 की औसत से एक शतक लगाते हुए 143 रन बनाए।

2008 में गांगुली ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। इसके बाद कुछ सीजन तक उन्होंने आईपीएल खेला। वो क्रिकेट प्रशासक भी रहे और इंडियन सूपर लीग में एक फुटबाल टीम के मालिक भी हैं। इस समय वो क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के प्रेसीडेंट हैं। इसके अलावा वो जाने-माने क्रिकेट कमेंटेटर भी हैं।

सचिन तेंदुलकर
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सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। सर डॉन ब्रेडमैन के बाद उन्हें दुनिया का सबसे बेस्ट बल्लेबाज माना गया। अपने क्रिकेट करियर के दौरान सचिन तेंदुलकर ने अपने दम पर अकेले भारतीय टीम को कई मैच जिताए। खासकर 90 और 2000 के शुरुआत में उनका बल्ला जमकर बोला।

हालांकि 2002 की चैंपियंस ट्रॉफी में वो रन नहीं बना पाए। 4 पारियों में 19.50 की औसत से वो 39 रन ही बना पाए।

2003 के वर्ल्ड कप में सचिन तेंदुलकर ने जोरदार वापसी की और मैन ऑफ द् टूर्नामेंट रहे।

सचिन वर्ल्ड क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। टेस्ट और वनडे दोनों ही प्रारुपों में उनके नाम दुनिया में सबसे ज्यादा रन हैं। वहीं इंटरनेशनल क्रिकेट में उनके नाम सबसे ज्यादा शतक दर्ज हैं। वो दुनिया के इकलौते बल्लेबाज हैं जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक लगाए हैं।

इस समय वो आईपीएल में मुंबई इंडियंस की टीम के मेंटोर हैं और हाल ही में उनकी बायोपिक ‘सचिन- ए बिलियन ड्रीम्स’ सिनेमाघरों में धूम मचा रही है।

राहुल द्रविड़
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राहुल द्रविड़ को भारतीय क्रिकेट टीम का ‘दीवार’ कहा जाता था। वो भारत के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाज थे। हालांकि एकदिवसीय मैचो में वो ज्यादा छाप नहीं छोड़ पाए क्योंकि बल्लेबाजी में वो निचले क्रम में आते थे।

2002 की चैंपियंस ट्रॉफी में उन्होंने 2 पारियों में 60 की औसत से 120 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 2 अर्धशतक जड़े।  2007 के वर्ल्ड कप में  उनकी कप्तानी में भारतीय टीम के पहले ही दौर से बाहर हो जाने के बाद उनका वनडे करियर ज्यादा नहीं चल पाया लेकिन टेस्ट मैचों में वो भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ बने रहे।

इस समय वो इंडिया अंडर-19 और इंडिया ए टीम के कोच हैं। उनकी कोचिंग में भारतीय अंडर-19 टीम 2016 के वर्ल्ड कप में फाइनल तक पहुंची।
युवराज सिंह
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2002 में नेटवस्ट ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ शानदार पारी खेलकर युवराज सिंह ने भारतीय टीम को एतिहासिक जीत दिलाई। इसके बाद वो भारतीय मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज बन गए। यही वजह रही कि उन्हें चैंपियंस ट्रॉफी में खेलने का मौका मिला।

हालांकि टूर्नामेंट में उन्हें महज 2 बार बल्लेबाजी का मौका मिला। 2 पारियों में युवराज ने एक अर्धशतक की मदद से 65 रन बनाए। इसके बाद उन्होंने भारतीय टीम के लिए कई मैच जिताऊ पारियां खेली। 2011 वर्ल्ड कप में वो मैन ऑफ द् टूर्नामेंट रहे।

2002 की चैंपियंस ट्रॉफी के सदस्यों में से जो 3 क्रिकेटर इस समय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं, उनमें से एक युवराज सिंह भी हैं। 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी में भी वो भारतीय टीम का हिस्सा हैं। इसके अलावा वो इंडियन प्रीमियर लीग में सनराइजर्स हैदराबाद की टीम का हिस्सा हैं।

मोहम्मद कैफ
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2002 की नेटवेस्ट ट्रॉफी में युवराज सिंह ने जब भारतीय टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई तो दूसरे छोर पर मोहम्मद कैफ उनके साथ थे। जितना योगदान युवराज का उस जीत में था उतना ही योगदान मोहम्मद कैफ का भी रहा।

चैंपियंस ट्रॉफी में युवराज की तरह 2 उन्हें भी 2 पारियों में ही खेलने का मौका मिला। इनमें उन्होंने एक मैच विनिंग शतकीय पारी भी खेली।

2003 वर्ल्ड कप के बाद खराब फॉर्म की वजह से कैफ का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर लंबा नहीं चल पाया। हालांकि कैफ उत्तर प्रदेश के हैं लेकिन इस समय वो छत्तीसगढ़ टीम के कप्तान हैं। इसके अलावा आईपीएल में वो गुजरात लायंस टीम से भी जुड़े हुए हैं।

हरभजन सिंह
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हरभजन सिंह भारत के दिग्गज स्पिनरों में से एक हैं। 2002 की चैंपियंस ट्रॉफी में वो टीम का हिस्सा थे और अब भी वे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं।

2002 की चैंपियंस ट्रॉफी में हरभजन सिंह ने काफी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने 5 मैचों में 6  विकेट चटकाए थे। फाइनल मुकाबले में श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने 3 विकेट लिए थे।

इसके बाद भी हरभजन सिंह का अच्छा प्रदर्शन जारी रहा। 2003 वर्ल्ड कप में भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया था। इसके अलावा 2007 टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 वर्ल्ड कप में भारत की जीत में उनकी अहम भूमिका रही थी।

हरभजन सिंह अभी भी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में एक्टिव हैं और भारतीय टीम में वापसी के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं। आईपीएल में वो वर्तमान चैंपियन मुंबई इंडियंस की टीम का हिस्सा हैं।

जहीर खान
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जहीर खान भारत के सबसे अच्छे तेज गेंदबाज हैं। अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर के दौरान भारत की जीत में उन्होंने अहम भूमिका अदा की। बड़े टूर्नामेंटों में भारत की सफलता के वो नायक रहे।

2002 की चैंपियंस ट्रॉफी में वो भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। इसके अलावा 2003 वर्ल्ड कप और 2011 वर्ल्ड कप में भी उन्होंने भारतीय टीम के लिए सबसे ज्यादा विकेट झटके।

जब तक जहीर खान ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास नहीं लिया तब तक वो भारतीय तेज गेंदबाजी की अगुवाई करते रहे।

करियर के आखिर में उनका खेल चोट की वजह से काफी प्रभावित हुआ। इसी वजह से उमेश यादव और मोहम्मद शमी जैसे गेंदबाजों को मौका मिला।

2015 में जहीर खान ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। इस वक्त आईपीएल में वो दिल्ली डेयरडेविल्स के कप्तान हैं।
अनिल कुंबले
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पूर्व दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले ना केवल भारत के सबसे अच्छे स्पिनर थे बल्कि वो दुनिया के बेस्ट स्पिनरों में से एक थे। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में विकेट लेने के बाद वो मुथैया मुरलीधरन और शेनवॉर्न के बाद तीसरे नंबर पर हैं। उनके नाम वर्ल्ड क्रिकेट में 619 विकेट हैं।

2002 के चैंपियंस ट्रॉफी में कुंबले ने 4 मैचो में 4 विकेट चटकाए थे। 2007 से 2008 तक वो भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान भी रहे।

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद कुछ सालों तक उन्होंने रॉयल चैंलेंजर्स बैंगलोर की तरफ से आईपीएल मैच भी खेले।आईपीएल से संन्यास लेने के बाद 2012 से 2015 के बीच वो आरसीबी और मुंबई इंडियंस के मेंटोर भी रहे। इस समय वो भारतीय टीम के कोच हैं।

अजीत अगरकर
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पूर्व तेज गेंदबाज अजीत अगरकर भी भारत के सबसे सफल गेंदबाजों में से एक थे। खासकर वनडे मैचो में उन्होंने काफी बेहतरीन गेंदबाजी की।

हालांकि 2002 की चैंपियंस ट्रॉफी में उन्हें मात्र 2 मैच खेलने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने 2 विकेट चटकाए। वो टूर्नामेंट में महंगे साबित हुए और 6 रन प्रति ओवर से ज्यादा रन दिए।

2003 वर्ल्ड कप के बाद उन्होंने काफी अच्छी गेंदबाजी की। लेकिन 2007 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा।

क्रिकेट से संन्यास के बाद काफी समय तक अगरकर ने गोल्फ खेला और 2016 में दिल्ली में कॉर्पोरेट टूर्नामेंट भी जीता। आईपीएल 2017 में वो क्रिकेट एनालिस्ट के तौर पर नजर आए।

जवागल श्रीनाथ
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जवागल श्रीनाथ भारत के सबसे तेज और बेहतरीन गेंदबाजों में से एक थे। उन्हें तेजी से गेंद डालने और स्विंग कराने के लिए जाना जाता था।

2002 के चैंपियंस ट्रॉफी में उन्हे महज एक ही मैच खेलने का मौका मिला। जिसमें उन्होंने 8 ओवर में 55 रन दिए।

2003 वर्ल्ड कप के बाद उन्होंने क्रिकेट से संन्यास ले लिया। इसके बाद 2005 में लेशिंग वर्ल्ड इलेवन की तरफ से मैच खेला।

इसके बाद वो कुछ दिन तक कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के सेक्रेंट्री भी रहे। इस समय वो आईसीसी के मैच रेफरी हैं।

जय प्रकाश यादव
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2002 की चैंपियंस ट्रॉफी की भारतीय टीम में जय प्रकाश यादव एकमात्र ऐसे खिलाड़ी थे जिन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला।

करियर के शुरुआती दिनों में उन्हें ट्यूमर की बीमारी थी लेकिन इससे रिकवर होकर उन्होंने जल्द ही भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया।

जेपी यादव का अंतर्राष्ट्रीय करियर काफी छोटा रहा। उन्होंने भारतीय टीम के लिए महज 12 वनडे मैच खेले। लगभग एक दशक पहले उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया और अपनी फिटनेस पर काफी काम किया। उन्होंने खुद को पूरी तरह से बदल डाला।

2013 में उन्हे रेलवे का चीफ सेलेक्टर बनाया गया। इस समय वो टीम के मुख्य कोच हैं।

आशीष नेहरा
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आशीष नेहरा भारत के उन क्रिकेटरों में से हैं जिन्होंने जीवन में कभी हार नहीं मानी। उन्होंने ये साबित किया कि उम्र कोई मायने नहीं रखती। युवराज सिंह और हरभजन सिंह के अलावा 2002 चैंपियंस ट्रॉफी के सदस्यों में नेहरा भी अभी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं।

2002 की चैंपियंस ट्रॉफी में उन्होंने 3 मैच खेले और 2 विकेट चटकाए। 2003 वर्ल्ड कप में वो भारतीय टीम का अहम हिस्सा थे।

37 साल की उम्र में भी वो इस समय भारतीय टी-20 टीम का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने अपना आखिरी टी-20 मैच इस साल फरवरी में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। दुर्भाग्यवश आईपीएल के दौरान वो चोटिल हो गए।

वीवीएस लक्ष्मण
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वीवीएस लक्ष्मण भारत के महान टेस्ट बल्लेबाजों में से एक थे। मध्यक्रम में वो भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ थे। वो भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के महान बल्लेबाजों में से एक माने जाते हैं।

राहुल द्रविड़ की ही तरह वीवीएस लक्ष्मण का भी वनडे करियर उतना प्रभावशाली नहीं रहा।

2002 की चैंपियंस ट्रॉफी में उन्होंने 2 मैचों में 26 रन बनाए। 2012 में क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी के साथ वीवीएस फाउंडेशन नाम से एक फाउंडेशन खोला। इस फाउंडेशन में उन बच्चों को शिक्षा मुहैया कराई जाती है जो कि सक्षम नहीं हैं।

वो इस समय क्रिकेट एनालिस्ट हैं और सनराइजर्स हैदराबाद के मेंटोर हैं।

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