मायावती को रोकने के लिए BJP का प्लान, मोदी सरकार में जायेंगे केशव प्रसाद मौर्य

नई दिल्‍ली: उत्‍तर प्रदेश के सियासी हलकों में इस बात की चर्चाएं तेज हो रही हैं कि उपमुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य केंद्र की सत्‍ता में जा सकते हैं. दरअसल सूत्रों के मुताबिक इसके पीछे मुख्‍य रूप से सियासी वजहों को जिम्‍मेदार माना जा रहा है. दरअसल मायावती के राज्‍यसभा इस्‍तीफे के बाद इन अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. उपमुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को अपने पद पर बने रहने के लिए विधानसभा या विधान परिषद का सदस्‍य बनना जरूरी है. फिलहाल वह फूलपुर से सांसद हैं. यदि वह विधानभवन में पहुंचते हैं तो उनको अपनी संसदीय सीट छोड़नी पड़ सकती है.

यूपी में बीजेपी की सरकार बने चार महीने से अधिक का समय हो चुका है. नियम के मुताबिक अब अगले दो महीने के अंदर योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्या को सांसद पद से इस्तीफा देकर विधानसभा की सदस्यता लेनी होगी. इस बात की चर्चा उसी वक्त से चल रही है जब बीजेपी ने विधानसभा चुनावों में जीत के बाद योगी को मुख्यमंत्री और केशव प्रसाद मौर्या को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था. हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि ये लोग राष्ट्रपति चुनाव के बाद इस्तीफा देंगे. अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी केशव प्रसाद मौर्या को यूपी में नहीं बल्कि केन्द्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकता है.

बीजेपी के इस अप्रत्याशित फैसले के पीछे भी एक राजनीतिक चर्चा मात्र है कि राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद मायावती केशव प्रसाद मौर्या द्वारा छोड़ी जाने वाली फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. आपको बता दें कि बीएसपी ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है हालांकि उसने हालिया चुनावों में मिली करारी हार के बाद बीएसपी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए मायावती की रणनीति का खुलासा जरूर किया है. जिसमें बताया गया है कि राज्यसभा से इस्तीफा देने वाली 18 तारीख को हर महीने दो मंडलों में एक रैली करेंगी. पार्टी में नई जान फूंकने के लिए मायावती ने 18 सितंबर 2017 से 18 जून 2018 तक यूपी दौरे का कार्यक्रम बनाया है.

आपको बता दें कि फूलपुर सीट मायावती के लिए मुफीद मानी जा रही है क्‍योंकि 1996 में यहां से पार्टी के संस्‍थापक कांशीराम चुनाव लड़ चुके हैं. उस दौरान सपा के जंग बहादुर पटेल ने उनको हरा जरूर दिया था लेकिन इस सीट पर अन्‍य पिछड़े वर्ग, अल्‍सपसंख्‍यक और दलित तबके की बड़ी आबादी है. यह भी सुगबुगाहट है कि मायावती के चुनाव लड़ने की स्थिति में सपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल एकजुटता दिखाते हुए उनकी उम्‍मीदवारी का समर्थन कर सकते हैं. इस सूरतेहाल में सपा, कांग्रेस और बसपा के गठजोड़ वाले संयुक्‍त वोट से बीजेपी के प्रत्‍याशी को मुकाबला करना होगा.

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