डीएम साहब! जरा, जिला अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था पर भी गौर करें, मरीज हैं बेहाल

प्रदीप वर्मा
गाजियाबाद। पूरे जिले को स्वास्थ्य​ सुविधाएं देने का दावा करने वाले जिला एमएमजी अस्पताल में डॉक्टरी सेवा और प्रशासनिक फैसले बेहद निचले स्तर पर हैं। अस्पताल में जहां एक फिजिशियन डॉक्टर​ पर जहां 500-600 मरीजों की फौज है। वहीं उल्टे-सीधे प्रशासनिक फैसलों से मरीजों को इधर-उधर चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
आपको बता दें कि जिला एमएमजी अस्पताल में प्रतिदिन करीब 15 सौ मरीज स्वास्थ्य​ लाभ के लिए आते हैं। इनमें से करीब 500 से 600 मरीज केवल ऐसे होते हैं जो फिजिशियन डॉक्टर के खाते में हैं। अस्पताल में फिजिशियन डॉक्टर केवल एक ही हैं जिनका नाम आरपी सिंह है। डॉक्टर आर पी सिंह को वीवीआईपी ड्यूटी के साथ-साथ एमर्जेंसी की ड्यूटी भी करनी पड़ती है। इसके अलावा कोर्ट में गवाही की ड्यूटी अलग से है। जिस का नतीजा है कि ड्यूटी समय में डॉ आर पी सिंह के बाहर होने की वजह से मरीजों की लंबी लाइन उनके कमरे के बाहर लगी रहती है। कभी-कभी तो यह लाइन डबल हो जाती है। अस्पताल में केवल एक फिजिशियन डॉक्टर होने की वजह से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में फैली अव्यवस्था का केवल यही कारण नहीं है, बल्कि एक अहम कारण अस्पताल की व्यवस्था सुधारने को जल्दबाजी में लिए गए फैसले भी है।

किन प्रशासनिक फैसलों से अस्पताल की व्यवस्था चरमराई

जिला अस्पताल में पहले OPD की मरहम पट्टी के लिए अलग से व्यवस्था थी। OPD के सारे मरीज परिसर में बने पट्टी रूम में जाकर ड्रेसिंग करा लेते थे। लेकिन अब पट्टी रूम को इमरजेंसी में शिफ्ट कर दिया गया है। जो तकनीकि रूप से गलत है। यानि अगर इमरजेंसी ंमें एकाएक ज्यादा मीज आ गये तो वहां का स्टाफ ओपीडी के मरीजों को संभालेगा या फिर इमरजेंसी के मरीजों को। वैसे भी नयी व्यस्था की वजह से मरीजों को इधर-उधर चक्कर काटने पड़ रहे है, क्योंकि ज्यादातर मरीजों को नए पट्टी रूम की जानकारी नहीं है।

दूसरे इमरजेंसी रूम को शिफ्ट करके आईसीयू में भेज दिया गया है। जहां व्यवस्था रामभऱोसे चल रही है। किसी भी अस्पताल की इमरजेंसी फ्रंट पर होती है ताकि मरीज को तुरंत से स्वास्थ्य सेवा मिल सकें, लेकिन एमएमजी अस्पताल में उल्टी ही कहानी चल रही है। इमरजेंसी को अस्पताल में सबसे पीछे पहुंचा दिया गया है। हालांकि अस्पताल प्रशासन इसे अस्थायी व्यवस्था बता रहा है, क्योंकि पहले जिस रूम में इमरजेंसी चल रही थी, उसकी छत के मरम्मत का काम चल रहा है। छत की मरम्मत का काम भी पिछले एक सप्ताह से ज्यादा हो चुका है, लेकिन अभी काम की रफ्तार तेजी नहीं पकड़ पायी है। जिसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है।

तीसरे अस्पताल प्रशासन का सबसे गलत फैसला रहा आईसीयू को शिफ्ट करना। किसी भी अस्पताल का इतिहास उठाकर देख लीजिए, आईसीयू बेहद शांत जगह दिया जाता है। जहां मरीजों के साथ परिवार का लोगों का शोरगुल न हो। लेकिन एमएमजी अस्पताल में आईसीयू को शिफ्ट करके ओपीडी के बीचोबीच शिफ्ट कर दिया गया है। जिससे आईसीयू के पास ओपीडी के मरीजों का शोरगुल रहता है। अस्पताल प्रशासन के इस कदम से आईसीयू के मरीजों को बेहद परेशानी हो रही है। अस्पताल आने वाले मरीजों का कहना है कि जहां इस समय इमरजेंसी सेवा को शिफ्ट कर दिया गया है, वह जगह आईसीयू के लिए मुफीद थी।

डीएम और सीएमओ दें ध्यान

एमएमजी अस्पताल के लगातार खराब हो रहे हालात पर वैसे तो पूर्व डीएम निधि केसरवानी ने कई बार औचक निरीक्षण किया, लेकिन हालात जस के तस बने हुए है। ऐसे में अब जरूरत है कि नई डीएम मिनिष्ती एस और सीएमओ अजय अग्रवाल अस्पताल पर ध्यान दें और यहां व्याप्त अव्यस्था को दूर करें, क्योंकि यहां आने वाले मरीजों को अब अस्पताल प्रशासन से ज्यादा उम्मीदें नहीं है, लेकिन उनकी ओर मरीज टकटकी लगाए देख रहे है कि शायद अब योगी राज में अस्पताल की व्यवस्थाएं कुछ सुधरेंगी।

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