14 मई को पदभार ग्रहण कर सकते हैं फ्रांस के नये राष्ट्रपति इमानुएल मैकरॉन

पेरिस : फ्रांस के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इमानुएल मैकराॅन इस सप्ताह के अंत में अपना पदभार ग्रहण कर सकते हैं. हालांकि, आधिकारिक रूप से शपथ ग्रहण समारोह की तारीख की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन एसोसिएटेड प्रेस ने कहा है कि नये राष्ट्रपति 14 मई (रविवार) को पदभार ग्रहण कर सकते हैं. खबरों में कहा गया है कि 14 मई, 2017 को वर्तमान राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का कार्यकाल पूरा होने से पहले नये राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए.

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द्वितीय विश्वयुद्ध में मिली विजय की वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में मैकरॉन पहली बार आधिकारिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति के रूप में ओलांद के साथ शामिल होंगे. इससे पहले संवैधानिक पर्षद गुरुवार को मतगणना के परिणाम को आधिकारिक रूप से जारी करेगा.
राष्ट्रपति का पदभार संभालने के तत्काल बाद मैकराॅन को प्रधानमंत्री चुनने के साथ-साथ सरकार का गठन भी करना होगा. यह पूरी प्रक्रिया कुछ दिनों में ही पूरी करनी होती है.
ज्ञात हो कि फ्रांस में एक पॉलिटिकल वंडर ब्वाॅय का उदय हुआ है. इमानुएल मैकराॅन ने फ्रांस का राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है. नेपोलियन के बाद वह देश के सबसे युवा राष्ट्रपति होंगे. बैंकर से राजनेता बने 39 साल के मैकराॅन ने रविवार को हुए दूसरे चरण के चुनाव में अपनी प्रतिद्वंद्वी और धुर दक्षिणपंथी रुझानोंवाली मरी ल पेन को मात दी. मैकराॅन को 65.5 से 66.1 प्रतिशत वोट मिले, जबकि मरीन ली पेन को महज 33.9 से 34.5 फीसदी.
अपने पहले संबोधन में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने वादा किया कि वह देश में मौजूद भेदभाववाली शक्तियों से लड़ेंगे, ताकि यूरोपीय संघ और उनके देशवासियों के बीच संपर्क को पुनर्स्थापित किया जा सके. यह भी कहा कि वह विचारों के आधार पर बंटे हुए देश को जोड़ेंगे और चरमपंथ और जलवायु परिवर्तन के खतरों का मुकाबला करेंगे.

मध्य पेरिस में विख्यात लूव्र म्यूजियम के बाहर जश्न मना रहे समर्थकों की एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी जीत फ्रांस के इतिहास में एक नये अध्याय की शुरुआत है. मैकराॅन की टीम ने कहा कि ‘नये राष्ट्रपति’ ने विरोधी उम्मीदवार मरी ल पेन से फोन पर बातचीत की, जो सौहार्द्रपूर्ण रही.
फ्रांसीसी गणतंत्र में 1958 के बाद यह पहला मौका है, जब चुना गया राष्ट्रपति फ्रांस के दो प्रमुख राजनीतिक दलों सोशलिस्ट और सेंटर राइट रिपब्लिकन पार्टी से नहीं है.
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1981 के बाद सबसे कम मतदान : गृह मंत्रालय के मुताबिक, फ्रांस के इस चुनाव में 66 फीसदी मतदान हुआ जबकि वर्ष 2012 में 72 फीसदी और वर्ष 2007 में 75.1 फीसदी मतदान हुआ था. इस बार का मतदान 1981 से अब तक के सभी चुनावों से काफी कम था.
मैकरॉन की टीम ने लगाया था हैकिंग का आरोप
उदारवादी विचारधारा के नेता इमैनुअल मैकरॉन व्यवसायियों और यूरोपीय संघ के समर्थक हैं. वहीं मरी ल पेन ‘फ्रांस पहले’ और आप्रवासन विरोधी कार्यक्रम की समर्थक हैं. शुक्रवार को प्रचार खत्म होने से पहले मैकरॉन की टीम ने दावा किया था कि उनका प्रचार अभियान बड़े पैमाने पर हैकिंग का शिकार हुआ है.
जीत पर दुनिया भर से मिल रही बधाई
राष्ट्रपति चुनाव में ऐतिहासिक जीत पर मैकरॉन की प्रतिद्वंद्वी मरी ल पेन ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि मैकराॅन के सामने बड़ी चुनौतियां हैं. वे इनसे निबटने में सफल होंगे, ऐसी कामना है.
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मैकरॉन के साथ काम करने को लेकर उत्सुक : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया कि फ्रांस के अगले राष्ट्रपति के रूप में मिली बड़ी जीत पर मैकराॅन को बधाई. मैं उनके साथ काम करने को लेकर उत्सुक हूं.
मैकरॉन को उनकी चुनावी जीत पर बधाई : थेरेसा मे
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे की ओर से डाउनिंग स्ट्रीट के प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री निर्वाचित राष्ट्रपति मैकरॉन को उनकी चुनावी जीत पर बधाई. फ्रांस हमारा करीबी सहयोगी है और हम नये राष्ट्रपति के साथ काम करने को बहुत उत्सुक हैं.
फ्रांस के लोग ‘गणतंत्र के मूल्यों’ के लिए एकजुट होना चाह रहे थे : ओलांद
फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने भी इमैनुएल मैकराॅन को बधाई दी. कहा कि चुनाव परिणामों ने दर्शाया है कि फ्रांस के लोग ‘गणतंत्र के मूल्यों’ के लिए एकजुट होना चाह रहे थे.
मैकरॉन की सफलता एक मजबूत और एकीकृत यूरोप की जीत : मर्केल
जर्मन चांसलर एंजला मर्केल के प्रवक्ता ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति की कामयाबी पर बधाई दी और कहा कि मैकरॉन की सफलता एक मजबूत और एकीकृत यूरोप की जीत है. मैकरॉन ने जर्मनी की चांसलर से फोन पर बात की. उनके सलाहकारों ने इस बातचीत को गर्मजोशी भरी बातचीत बताया. खबरों के मुताबिक, मैकरॉन ने इस बात की पुष्टि की है कि जल्दी ही वह चांसलर मर्केल से बर्लिन में मुलाकात करेंगे. यूरोपियन कमीशन के प्रमुख ज्यां क्लॉड युंकर ने भी मैकराॅन के बारे में ऐसी ही राय व्यक्त की है.
‘देशभक्तों और वैश्वीकरण के हिमायतियों’ में विभाजित है फ्रांस : पेन
एक भाषण में मरी ल पेन ने उन 1.10 करोड़ मतदाताओं का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उनके लिए मतदान किया था. उन्होंने कहा कि चुनाव ने दिखा दिया है कि फ्रांस ‘देशभक्तों और वैश्वीकरण के हिमायतियों’ में विभाजित है. ल पेन ने कहा कि उनकी नेशनल फ्रंट पार्टी को पुनर्विचार करने की जरूरत है और उसकी शुरुआत वह तुरंत करेंगी, ताकि आगामी संसदीय चुनाव में उन्हें जीत हासिल हो सके.
पॉलिटिकल वंडर ब्वॉय के बारे में जानें
बैंकर से राष्ट्रपति चुने गये मैकरॉन तीन साल पहले तक फ्रांस की राजनीति का अनजान चेहरा थे. वह फ्रांस्वा ओलांद सरकार में वित्त मंत्री रहे और अगस्त, 2016 में नयी सियासी मुहिम ‘इन मार्श’ की शुरुअात की. इसके चार महीने बाद सरकार से इस्तीफा देकर राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की घोषणा की. उन्होंने राष्ट्रपति पद की दावेदारी पेश की, तो उनका मजाक उड़ाया गया. नौसिखिया तक कहा गया. उनकी पहचान एक उदारवादी नेता के रूप में है. वह खुले तौर पर यूरोपीय यूनियन के समर्थक हैं.
-21 दिसंबर, 1977 को फ्रांस के एमियेंज में इमानुएल मैकराॅन का जन्म हुआ.
फिलाॅसफी से छात्र रहे इमानुएल वर्ष 2004 में ग्रेजुएट होने के बाद इन्वेस्टमेंट बैंकर बन गये.
-2006 से 2009 के बीच सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य रहे.
-2012 में पहली बार जब फ्रांस्वा ओलांद की सरकार बनी, तो मैकराॅन को डिप्टी सेक्रेटरी जनरल चुना गया.
-2014 में मैकराॅन फ्रांस्वा ओलांद की सरकार में वित्त मंत्री बने.
अगस्त, 2016 में सरकार से इस्तीफा देकर राष्ट्रपति पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की.
‘मैकराॅन की जीत सफलता की एक शानदार कहानी है. एक ऐसे व्यक्ति की कहानी, जिसे तीन साल पहले फ्रांस के लोग जानते तक नहीं थे. केवल आत्मविश्वास, ऊर्जा और लोगों से जुड़ाव की बदौलत मैकराॅन ने एक ऐसा राजनीतिक आंदोलन खड़ा किया, जिसने फ्रांस की सभी स्थापित राजनीतिक पार्टियों को पछाड़ दिया.’
ह्यूज शेफील्ड, पत्रकार
मैकराॅन के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां
अब तक कोई भी निर्वाचित पद न संभालनेवाले 39 साल के मैकराॅन राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद यूरोप के सबसे शक्तिशाली नेता बन कर उभरे हैं. इस जीत के साथ ही अब मैकराॅन के सामने फ्रांस और यूरोपीय संघ के राजनीतिक और आर्थिक सुधार का बेहद महत्वपूर्ण एजेंडा होगा. उन्हें देश की आंतरिक हालात से लेकर आर्थिक, वैश्विक और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी, ताकि जनता की उम्मीदों पर खरा उतर सकें. चुनाव परिणाम का असर पूरी दुनिया पर होगा. मुख्य रूप से ब्रुसेल्स और बर्लिन को चुनावी नतीजों से राहत मिली है, क्योंकि मरी ल पेन की हार के साथ ही उनके यूरोपीय संघ विरोधी और वैश्वीकरण विरोधी अभियानों की हार हो गयी है.

1. संसदीय चुनाव : 11 और 18 जून को होनेवाले संसदीय चुनावों में जनाधार बचाये रखने की सबसे बड़ी चुनौती मैकराॅन की पार्टी के समक्ष होगी.उनकी पार्टी के पास संसद में एक भी सीट नहीं है. चुनाव में उनकी पार्टी इन मार्श को चुनाव लड़ना होगा, लेकिन अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए गंठबंधन का सहारा लेना पड़ सकता है. कई राजनीतिक दलों ने सिर्फ ल पेन को हराने के लिए मैकराॅन का राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन किया था.
. शरणार्थियों का मुद्दा : फ्रांस में आनेवाले शरणार्थियों की संख्या कम है. फिर भी मैकराॅन के सामने उनकी समस्याओं को सुलझाने की चुनौती होगी. शरणार्थियों के मुद्दे ने राष्ट्रपति चुनाव में अहम भूमिका निभायी है. वर्ष 2016 में फ्रांस में सिर्फ 85 हजार शरणार्थी आये थे, लेकिन कई आतंकी हमलों के बाद धर्मनिरपेक्ष देश में मुसलिम आबादी के साथ तनाव बढ़ गया है. साथ ही मैकराॅन नागरिकता हासिल करने के लिए फ्रेंच भाषा की अनिवार्यता का भी समर्थन कर चुके हैं.
3. आर्थिक सुधार : सरकारी खर्च घटाना बड़ी चुनौती होगी. सामाजिक सुरक्षा और सरकारी नौकरियों पर यह तलवार की तरह लटक रही है. फ्रांस में 52 लाख लोग सरकारी नौकरियों में हैं, जो कुल वर्कफोर्स का 20 फीसदी है. ल पेन की नौकरियों में कटौती की कोई योजना नहीं थी, लेकिन मैकराॅन की नीतियां इसके समर्थन में हो सकती हैं.

4. आतंकवाद : वर्ष 2015 के बाद फ्रांस में हुए आतंकी हमलों में 230 लोगों की जान जा चुकी है. हमलों को देश की आंतरिक सुरक्षा में सेंध माना गया. आतंकवाद और सुरक्षा के मामले में मैकराॅन ने सख्त रवैया अपनाने की वकालत की है. फ्रांस के सैकड़ों लोग सीरिया और इराक में लड़ने गये थे, जो लौट आये हैं. निर्वाचित राष्ट्रपति के पास ऐसे गंभीर मामलों से निबटने का कोई अनुभव नहीं है. सेना के सर्वोच्च कमांडर होने के बाद उन्हें जल्द से जल्द यह दिखाना होगा कि इन मामलों पर भी उनकी मजबूत पकड़ है.
5. बेरोजगारी : फ्रांस की नयी सरकार को युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराने होंगे. देश में बेरोजगारी का मुकाबला करने में विफलता को ही ल पेन की दक्षिणपंथी पार्टी की लोकप्रियता की मुख्य वजह माना गया. मैकराॅन ने श्रम बाजार में सुधारों की बात कही है. साथ ही कमजोर कमजोर श्रम कानूनों को बदल कर रोजगार के नये अवसर उपलब्ध कराना उनके चुनावी एजेंडे में था. यदि वह अपनी योजना पर आगे बढ़े, तो उन्हें वामपंथी विरोधियों और ट्रेड यूनियन का विरोध झेलना पड़ सकता है.

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