जानिए भारत में कहां-कहां हैं सबसे प्राचीन गणपति मंदिर

गणेश हिंदुओं के आदिदेव हैं. किसी भी कार्य से पहले या पूजन में सबसे पहले उन्हें ही पूजा जाता है. गणेश एकमात्र ऐसे देवता हैं, जिनके चित्र सबसे अधिक अलग-अलग आकृतियों में देखने को मिलते हैं. कहते हैं कि कुंडली में बुध ग्रह के अशुभ स्थिति में होने पर बुधवार को गणेश का पूजन करना लाभदायक होता है. हिंदू मान्यता के अनुसार अगर घर में धन नहीं रुकता, बेवजह धन व्यर्थ होता है, घर में क्लेश मचा रहता है, तो यह सब बुधवार को व्रत या पूजन से दूर किया जा सकता है. ये तो बात थी पूजा के द्वारा अपनी आर्थ‍िक स्थ‍िति सुधारने की. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देवों में देव आदिदेव भगवान गणेश के भारत के सबसे प्रसिद्ध, सबसे धनी और सबसे प्राचीन गणपति मंदिरों के बारे में. एक नजर-

सबसे लोकप्रिय मंदिर
मुंबई के प्रभादेवी इलाके में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर को देश का सबसे लोकप्रिय मंदिर माना जाता है. एक आकलन के मुताबिक यहां हर रोज 60 हजार से अधिक श्रद्धालु भगवान सिद्धिविनायक की पूजा करने आते हैं. गणेश चतुर्थी के दौरान यहां औसतन हर रोज लगभग एक लाख से अधिक लोग दर्शन के लिए आते हैं.

यहां सन 1801 में एक नि:संतान महिला देवबाई पाटिल ने एक चबूतरे पर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करवाई थी, जिसके बाद उनकी गोद हरी हो गई. धीरे-धीरे इसकी ख्याति पूरी दुनिया में फैली और श्रद्धालु यहां जुटने लगे.

सबसे धनी गणपति मंदिर

संचित धन के दृष्टिकोण से पुणे स्थित दगडुशेठ गणपति मंदिर के बारे में मान्यता है कि यह देश का सबसे धनी गणपति मंदिर है. इस मंदिर की स्थापना श्रीमंत दगडुशेठ नामक एक हलवाई ने की थी. लेकिन नकद चढ़ावा सहित जमीन और अचल संपति के मामले में इंदौर स्थित खजराना गणेश मंदिर सबसे धनी मंदिर है, जबकि रोजाना चढ़ावा के लिहाज से मुंबई सिद्धिविनायक मंदिर सबसे आगे है.

नए मंदिरों में सबसे बड़ा सिद्धिविनायक मंदिर

गुजरात के अहमदाबाद से 32 किमी. दूर मेहमदाबाद में सन 2014 में बने सिद्धिविनायक मंदिर को भगवान गणेश का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है. इस मंदिर का निर्माण 6 लाख स्क्वायर फीट में हुआ है. मुख्य मंदिर जमीन से 20 फीट ऊंचाई पर स्थित है, जिसमें भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना जमीन से 56 फीट की ऊंचाई पर की गई है. लगभग 14 करोड़ लागत से बने इस मंदिर की ऊंचाई 71 फीट है.

काले गणेशजी का सबसे प्रसिद्ध मंदिर

तमिलनाडु के तिरुपत्तूर स्थित करपगा विनायगर मंदिर के काले गणेशजी की प्रतिमा केवल भारत ही नहीं पूरी दुनिया में विख्यात है. एक गुफा में स्थापित काली चट्‌टान से बनी छह फीट के गणेशजी इस प्रतिमा को लगभग 1600 साल पांड्य वंश के राजाओं मंदिर करवाया. गणेशजी की यह अद्भुत प्रतिमा सूंड सहित संपूर्ण शरीर सोने से ढंका हुआ है.

भगवान गणेश का सबसे प्राचीन मंदिर

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित इदागुंजी गणेश मंदिर को ईसा पूर्व चौथी सदी का माना जाता है. यह मंदिर किसने बनवाया यह तो पता नहीं, लेकिन इसकी गिनती देश के सबसे प्राचीन और पश्चिमी तट के सबसे प्रमुख गणपति मंदिरों में होती है. यहां की प्रतिमा बड़ी अनूठी है, जिसमें गणेशजी की मात्र दो भुजाएं हैं और वे खड़ी अवस्था में हैं.

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