माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का आस्था पर्व है शारदीय नवरात्रि

अनिल कुमार श्रीवास्तव: माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का आस्था पर्व शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ आगामी 21 सितंबर से हो रहा है।धारणा है कि गुरुवार से शुरू इस महापर्व में महामयी की सच्चे मन से पूजा अर्चना करने वाले जातक की मनो इच्छा जरूर पूरी होती है।
वैसे तो श्रद्धालु श्रद्धानुसार उपवास रख पूरे नौ दिन तक भक्ति में रम जाते हैं लेकिन इस व्रत में घट स्थापना का सबसे अधिक महत्व होता है।

पितृपक्ष पखवारा समाप्त होने के बाद श्रद्धालु नवरात्रि के पहले दिन किसी भी समय कलश स्थापना कर सकते हैं मातारानी किसी का अहित नही करती फिर भी इस बार 21 सितंबर को सुबह 6:03 से 8:22 तक घट स्थापना का शुभमुहूर्त बताया गया है।स्थापना के बाद क्रमशः गुरुवार को मां शैलपुत्री, शुक्रवार को मां ब्रम्हचारिणी, शनिवार को मां चन्द्रघटा, रविवार को मां कुष्मांडा, सोमवार को मां स्कंदमाता, मंगलवार को मां कात्यायनी, बुधवार को मां कालरात्रि, गुरुवार को मां महागौरी, शुक्रवार को मां सिद्धिदात्री रूपो की स्तुति की जाएगी।बहुत से लोग मां सिद्धिदात्री की स्तुति के बाद कुँवारी कन्याओं को भोज आदि करा कर उद्यापन कर देते है तो कुछ लोग व्रत का समापन अगले दिन करते हैं।आस्था के इस पर्व में कन्याओं को विशेष महत्व दिया जाता है।

श्रद्धालु समूचे नवरात्रि कुंवारी कन्याओं की सेवा कर समापन वाले दिन मनपसन्द भोज करा कर कन्याओं को यथा सम्भव दान देते हैं।हिन्दू धर्म मे उन्हें देवी का रूप मान उनकी सेवा के एवज में मातारानी को खुश करना मानते हैं।

उधर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में कायस्थ इस पर्व को बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाते हैं।उनमें दुर्गा माँ के हर रूप से साथ सप्तमी तिथि का विशेष महत्व है।

सीतापुर के असुवामऊ गाँव समेत अन्य कई कायस्थ बहुल गांवों में सप्तमी तिथि को मां भद्रकाली की पूजा वाले दिन श्रद्धालुओ का मेला सा लग जाता है।इस दिन देश विदेश में रह रहे कायस्थ समुदाय के लोग अपने गांव पहुंच कर मां भद्रकाली की स्तुति अवश्य करते हैं।इसके पीछे एक बहुत प्राचीन किवदंती हैं।रात्रि में भद्र लगते समय कायस्थ कुल की रक्षा के लिए मां भद्रकाली को प्रसन्न करते हैं और वह प्रसाद मात्र परिवार और कुल में मिलबांट कर ग्रहण करते हैं।इस दिन वो परिवार में शामिल नए सदस्य को मां भद्रकाली के सम्मुख मिलवाते भी हैं जैसे नवजात शिशु व नवविवाहिता आदि।

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